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अमरउजाला कर रहा है IAS ओमप्रकाश की चाटुकारिता और पर्वतजन पत्रकार शिव प्रसाद सेमवाल बचा रहे हैं पत्रकारिता का सम्मान

मामला उत्तर प्रदेश के पूर्व विधायक और मधुमिता हत्याकांड के मुख्य अभियुक्त अमरमणि त्रिपाठी के विधायक बेटे अमनमणि त्रिपाठी और उत्तराखंड सरकार में अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश के गठबंधन से जुड़ा हुआ है सारी दुनिया करोना महामारी से जूझ रही है तथा सभी को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए सरकारें एकजुट हैं पुलिस प्रशासन ने दिन रात एक करा हुआ है लेकिन यह नेता और आईएस अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं मामला उत्तर प्रदेश उत्तराखंड से जुड़ा हुआ है उत्तर प्रदेश के विधायक अमनमणि त्रिपाठी पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के पिता के घर पहुंचे और उसके बाद बद्रीनाथ के लिए रवाना हो गए रुद्रप्रयाग में जब पुलिस ने उनको रोका तो वह राजनीतिक पहुंच की धौंस दिखाने लगे जब उनसे बद्रीनाथ जाने का मकसद पूछा गया तो उन्होंने बताया कि वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के पिता की आत्मा की शांति के लिए पूजा करने बद्रीनाथ जा रहे हैं जब उनसे यात्रा के कागजात मांगे गए तो उनके पास दो परमिशन मिली जिसमें एक पर आईएएस ओमप्रकाश के हस्ताक्षर थे तथा दूसरे में रामजी शरण आईएएस के हस्ताक्षर मौजूद थे चौंकाने वाली बात यह थी कि जब पूरे देश में लोग डाउन चल रहा था तब 3 गाड़ियों में सवार 11 लोगों को कैसे बद्रीनाथ जाने की परमिशन मिल गई सवाल यह भी उठता है जब योगी आदित्यनाथ के पिता का देहांत हुआ तो उनके परिजन ही उनकी आत्मा की शांति की पूजा करेंगे या फिर कोई नेता आकर पूजा अर्चन कर उनकी आत्मा को शांति दिलाएगा सवाल यह खड़ा होता है की महाराष्ट्र की घटना से क्या उत्तराखंड सरकार के लोग ये विवादित आईएस सबक नहीं लेना चाहते सवाल यह भी खड़ा होता है कि इन आईएएस अधिकारियों के खिलाफ भारत सरकार की गाइडलाइन पालन न करने के कारण मुकदमा क्यों नहीं कायम हो रहा सवाल यह भी हो रहा है कि करोना महामारी को फैलाने के आरोप में इनके खिलाफ क्यों ठोस कार्रवाई नहीं हो रही धन्य है मुनिकीरेती कि पुलिस और रुद्रप्रयाग के SDM जिन्होंने हिम्मत जुटा कर इन नेताजी को हवालात में पहुंचा दिया और इनके खिलाफ मुकदमा कायम कर दिया कर्मभूमि टीवी उनकी हिम्मत को सलाम करता है सवाल यह भी खड़ा होता है क्या भ्रष्ट अधिकारियों तथा नेताओं पर लगाम नहीं रखनी चाहिए सवाल यह भी खड़ा होता है कि कानून सिर्फ आम आदमी के लिए है 3 गाड़ियों में बैठे 11 लोग क्या सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे थे सवाल यह भी खड़ा होता है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के परिवार में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जो उनके पिता की आत्मा की शांति की पूजा कर सके या फिर उत्तर प्रदेश के लोगों के हाथ में कोई जादू है कि वह सीधा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के पिता को मोक्ष प्रदान करेंगे कर्मभूमि टीवी उन पत्रकारों को सलाम करता है जिन्होंने इस खबर को प्राथमिकता पर उठाया और अमरउजाला जैसे अखबार के खिलाफ एक मोर्चा खड़ा करेगा जो की झूठी खबरें लगातार अखबारों में छपते रहे हैं और सरकारों की चाटुकारिता करते रहें अमरउजाला जैसे अखबारों ने पत्रकारिता की विश्वसनीयता खत्म कर दी है और अखबारों को एक बाजार बना दिया है

आज का अमरउजाला
विवादित IAS ओमप्रकाश
परमीशन
IAS ओमप्रकाश के हस्ताक्षर

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