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भारत देश में जनहित याचिकाओं की क्रांति

यह तोप खाने के कमजोर होने का दौर है : इससे पहले समाज की लड़ाई में कलम और अखबार की बड़ी भूमिका रही है . आजादी की लड़ाई के दौर और आजाद भारत के शुरुआती सालों में यह उक्ति प्रचलन में थी.कि एक कलम सौ तलवार पर भारी , और मुकाबिल हो तोप तो अखबार निकालो , लेकिन समय चक्र बदला ,आजाद भारत में वर्ष 1950 -51 में एक. के गोपालन वर्सेस स्टेट ऑफ मद्रास में सुप्रीम कोर्ट ने विधि सम्मत प्रक्रिया से पारित कानून और निर्णयों पर हस्तक्षेप से इनकार करते हुए विधानमंडल और संसद की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से मना करते हुए जो निराशाजनक हमारी न्याय यात्रा शुरू हुई , वह गोलकनाथ व केशवानंद भारतीय के सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित केसो में मूल अधिकार और बेसिक स्ट्रक्चर से आगे बढ़ते हुए 1979 में हुसैनारा खातून बनाम बिहार राज्य के द्वारा समूह के हितों की रक्षा करने के कानून की तरफ बडे , जिसे कालांतर में जनहित याचिका नाम दिया गया । जिस का प्रावधान भारत के संविधान के अनुच्छेद 39 A में परिभाषित है. जहां संविधान के सामाजिक न्याय के उद्देश्य की प्राप्ति हेतु न्यायपालिका के हस्तक्षेप और संरक्षण का मार्ग निर्धारित किया गया है. इसी प्रावधान के तहत जनहित के विषयों पर अनुच्छेद 32 की भांति सीधे सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने का प्रावधान प्रचलित हुआ।

लेखक/प्रमोद शाहः

जानहित याचिकाओं ने इस देश के सामाजिक इतिहास में अभूतपूर्व क्रांति की ।एक दौर में अमेरिकी न्यायपालिका का पर्याय न्यायिक सक्रियता भारत की न्यायपालिका का चेहरा बन गया , इसके लिए हम सर्वाधिक जस्टिस पी एन भगवती के योगदान को भी याद करेंगे। अब थके हारे मजबूर मजदूरों और निराश नागरिकों के लिए उम्मीद की एक बेमिसाल किरण जनहित याचिका ही है ।एक पोस्टकार्ड से डाली गई जनहित याचिका ने वह सब काम किया है, जो हजारों की तादाद में इकट्ठा नागरिकों और उनके महीनों के संघर्ष नहीं कर पाए . इसलिए जनहित याचिका सामाजिक न्याय प्राप्ति का अब सबसे असरदार हथियार है .
हमारे बेहद प्रतिभाशाली अनुज अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली ने संविधान में निहित इन प्रावधानों की ताकत को पहचाना है . और समय-समय पर दायर की गई उनकी जनहित याचिकाओं ने समाज को दिशा देने का काम किया है .उनके ही द्वारा सबसे पहले उत्तराखंड में बढ़ रही नशे की प्रवृत्ति को रोकने के लिए विद्यालयों में एंटी ड्रग क्लब बनाने, पुलिस के जागरूकता कार्यक्रमों के साथ अन्य उपायों के निर्देश दिलवाए और आज स्वयं सर्वोच्च न्यायालय NA L S A के तहत नशे की बुराई को मॉनिटर कर रहा है . इसके अतिरिक्त नदी और पर्यावरण पर भी श्री दुष्यंत मैनाली ने उच्च न्यायालय नैनीताल से बहुत जन हितैषी निर्णय प्राप्त किए ,आज कोरोना के काल में . जब राज्य के पर्वतीय क्षेत्र स्वास्थ्य के प्रारंभिक ढांचे के लिए संघर्षरत थे . तब उनकी जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय नैनीताल ने न केवल पर्वतीय क्षेत्र के चुनिंदा अस्पतालों में वेंटिलेटर मुहैया कराने के आदेश के साथ हु उपलब्धता सुनिश्चित की , बल्कि 4 मई तक राज्य के कुछ मुख्य अस्पतालों में आई सी यू भी प्रारंभ करने के आदेश दिए हैं. यह सब स्वास्थ्य ढांचे के लिए संघर्ष कर रहे हमारे राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय है. इसका निश्चित रूप से लोक स्वास्थ्य पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा. माननीय न्यायमूर्ति ने न केवल यह निर्णय दिया, बल्कि याचिकाकर्ता अधिवक्ता के सामाजिक सरोकारों की सराहना भी की .
अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली , राज्य और समाज के बहुत से ज्वलंत विषयों पर चिंतित रहते हैं, चर्चा करते हैं. उससे उम्मीद जगती है. कि आने वाले दिनों में कुछ और महत्वपूर्ण निर्णय उनकी जनहित याचिकाओं से राज्य और समाज के हित में प्राप्त होंगे .
बहुत शुभकामनाएं अनुज अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली , आपके सामाजिक सरोकार और चिंतन दीर्घजीवी हों बहुत शुभकामनाएं 💐💐

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