Homeदेशसुप्रिया बेटी की सुंदर कविता

सुप्रिया बेटी की सुंदर कविता

मेरीप्रिय सखी…मेरेप्रिय सखा ।

घर में ही रहना है जरुरी…यह समय प्रतिकूल सा

मेरीप्रिय सखी…मेरेप्रिय सखा ।

मेरीप्रिय सखी…मेरेप्रिय सखा ।

चारों तरफ भय व्याप्त है… विषाणु जनित इक व्याधि का
नाम है कोरोना इसका…डर रहा सारा जहां ।।
संघरोध…संचाररोध…साधन यही है बचाव का ।

मेरीप्रिय सखी…मेरेप्रिय सखा ।

मेरीप्रिय सखी…मेरेप्रिय सखा ।

घर से निकलना है तभी..जब जरुरी काम हो ।
ना गले मिलना..न छूना…बस दूर से प्रणाम हो ।।
थूकना ना राह में…इससे संक्रमण है बढ़ रहा ।

मेरी प्रिय सखी…मेरेप्रिय सखा ।

मेरीप्रिय सखी…मेरेप्रिय सखा ।

नाक- मुँह पर हो मयुख …बना जो सूती परिधान का
हाथ धोना पैर धोना नित…आवश्यक है स्वच्छता ।
आफवाहों से डरें ना…संयम रखेंगे हम सदा ।

मेरीप्रिय सखी…मेरेप्रिय सखा ।

मेरीप्रिय सखी…मेरेप्रिय सखा ।

है कई योद्धा जो इससे लड़ रहे हर हाल में ।
पग-पग सिपाही…स्वच्छ कर्मी और वैद्य है उपचार में ।।
पर जरुरी है उन्हे दें हौसला इस काम का ।

मेरीप्रिय सखी…मेरेप्रिय सखा ।

मेरीप्रिय सखी…मेरेप्रिय सखा ।

सोचना ना ये कभी की पिंजरे में अपनी जान है !
शुक्र है भगवान का कि…ये पिंजरा आलीशान है !!
हो भला उनका भी जिनका सुलभ न घर जाना हुआ ।

मेरीप्रिय सखी…मेरेप्रिय सखा ।

मेरीप्रिय सखी…मेरेप्रिय सखा ।

सब हों सुखी और स्वस्थ भी…प्रभु से यही अरदास है।
लौट आयेंगी बहारे…ये मुझे विश्वास है ।।
हंसी-खुशी हम फिर मिलेंगे…टूटे न मन की भावना ।

मेरीप्रियसखी…मेरे प्रिय सखा

घर में ही रहना है जरुरी…यह समय प्रतिकूल सा

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