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वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे 3 मई :नेपाल, भूटान और श्रीलंका से भी पीछे है भारत

आज वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे है। हर साल 3 मई को यह दुनियाभर में मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मकसद दुनियाभर में प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा तय कराना है। प्रेस स्वतंत्रता के मामले में भारत का स्थान बहुत नीचे है। वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में 180 देशों की सूची में भारत 142वें नंबर पर आता है। पिछले चार सालों से भारत का स्थान लगातार गिर रहा है।

यूनेस्को महासम्मेलन की अनुशंसा के बाद दिसंबर 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 3 मई को प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाने की घोषणा की थी। तब से लेकर आज तक हर साल 3 मई को ये दिन मनाया जाता है। इस बार इसकी थीम है ‘लोकतंत्र के लिए मीडिया- फर्जी खबरों और सूचनाओं के दौर में पत्रकारिता एवं चुनाव’ रखी गई है।

नेपाल, भूटान और श्रीलंका से भी पीछे है भारत

इस मामले में भारत अपने पड़ोसी देश नेपाल (112), भूटान(67), श्री लंका (127) और म्यांमार (139) से पीछे है। हालांकि, पाकिस्तान (145), बांग्लादेश (151) और चीन (177) में भारत से भी खराब स्थिति है। भारत का स्थान पिछले चार सालों से नीचे खिसक रहा है। 2016 में भारत का स्थान 133 था जो 2017 में तीन अंक खिसककर 136, 2018 में 138, 2019 में 140 और 2020 में 142 हो गया। भारत का स्थान पिछले तीन सालों से लगातार दो-दो अंक लुढ़क रहा है। 

भारत में पांच साल में पत्रकारों पर हुए 198 हमले


एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2014 से 2019 तक पत्रकारों पर 198 हमले हुए हैं। इसमें 36 हमले साल 2019 में हुए। 40 हमलों में पत्रकार की हत्या कर दी गई, जिसमें 21 हत्याएं सीधे तौर पर खबर छापने से नाराज होने पर की गईं। कुल हमलों के तिहाई मामलों में एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई है।

इस अवसर पर कर्मभूमि टीवी की तरफ से आप सभी को सुभकामनाये

आखिर क्यों मनाया जाता है यह दिवस

दुनियाभर के कई देशों में पत्रकारों और प्रेस पर अत्याचार होता है। मीडिया संगठनों को सरकारें परेशान करती हैं। उन पर जुर्माना लगाया जाता है, छापा डाल जाता है। साथ ही विज्ञापन बंद कर आर्थिक रूप से नुकसान भी पहुंचाया जाता है। पत्रकारों पर हमले होते हैं। इसके चलते यूनेस्को ने 1993 से वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे मनाने की शुरुआत की थी। इस मौके पर नागरिकों और सरकारों को जिम्मेदार बनाने के लिए प्रेरित किया जाता है।

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